भोपाल। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती पर रविवार को राजधानी भोपाल के माता मंदिर क्षेत्र में आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिला। पाल समाज श्रीकृष्ण गोवर्धन गिरिराज मंदिर समिति के तत्वावधान में पाल, बघेल, यादव, ग्वाला एवं धनगर समाज द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित भव्य समारोह में हजारों की संख्या में समाजजन शामिल हुए। कार्यक्रम के अंतर्गत विशाल चल समारोह निकाला गया तथा इसके पश्चात एक गरिमामयी आमसभा का आयोजन किया गया।
पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ सायं 5 बजे पाल समाज श्रीकृष्ण गोवर्धन मंदिर प्रांगण में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इसके बाद लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की स्मृति में भव्य चल समारोह निकाला गया। यात्रा में शामिल समाजजन “देवी अहिल्याबाई होल्कर जिंदाबाद” और “जय श्री राधे-राधे” के उद्घोष लगाते हुए आगे बढ़े। पूरे मार्ग में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना रहा।

झांकियों और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां बनीं आकर्षण का केंद्र
चल समारोह में आकर्षक झांकियों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। रंग-बिरंगी झांकियों के माध्यम से लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, उनके जनकल्याणकारी कार्यों और सांस्कृतिक योगदान को प्रदर्शित किया गया। बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ गई।

जगह-जगह पुष्पवर्षा कर हुआ स्वागत
मंदिर प्रांगण से प्रारंभ हुआ चल समारोह क्षेत्र के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए माता मंदिर सेकंड स्टॉप तक पहुंचा। यात्रा मार्ग में अनेक स्थानों पर मंच बनाकर समाज के गणमान्य नागरिकों एवं स्थानीय निवासियों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। समाजजनों के उत्साह और श्रद्धा ने पूरे आयोजन को एक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।
लोकमाता के आदर्श आज भी प्रासंगिक : भगवानदास सबनानी
चल समारोह के समापन के बाद पीएचई कार्यालय के समीप स्थित मंदिर परिसर में विशाल आमसभा आयोजित की गई। मुख्य अतिथि दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक भगवानदास सबनानी ने अपने संबोधन में कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर केवल एक शासक नहीं थीं, बल्कि वे जनकल्याण और धर्म संरक्षण की प्रतीक थीं। उन्होंने देशभर में अनेक मंदिरों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक केंद्रों का पुनर्निर्माण कर सनातन संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान की। उनके जीवन और कार्यों से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देना आज की आवश्यकता है।

सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण बना आयोजन
विशिष्ट अतिथि भोपाल नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि पाल, धनगर, यादव और ग्वाला समाज द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह समारोह सामाजिक एकता और समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि लोकमाता के आदर्श समाज को एकजुट रखने और विकास की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
महिला सशक्तिकरण और न्यायप्रियता पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में पार्षद एवं एमआईसी सदस्य जगदीश यादव तथा क्षेत्रीय पार्षद एवं जोन अध्यक्ष श्रीमती बृजुला सचान ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के कुशल प्रशासन, न्यायप्रियता, महिला सशक्तिकरण और जनसेवा के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
देशभर में कराए जनकल्याणकारी निर्माण कार्य
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पाल समाज श्रीकृष्ण गोवर्धन गिरिराज मंदिर समिति के अध्यक्ष महेन्द्र सिंह बघेल ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर एक दूरदर्शी शासक, समाजसेवी और जननेता थीं। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों, घाटों, धर्मशालाओं और जनसुविधाओं का निर्माण कराकर समाज के लिए अमूल्य योगदान दिया। उनके आदर्श वर्तमान पीढ़ी को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण की भोजन प्रसादी
कार्यक्रम के समापन पर आयोजन समिति द्वारा सभी अतिथियों का सम्मान किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं और समाजजनों के लिए भव्य भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने सहभागिता की। पूरे आयोजन के दौरान समाज के वरिष्ठजन, युवा, महिलाएं और मातृशक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कौन थीं लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर?
लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास की महानतम महिला शासकों में गिनी जाती हैं। मालवा राज्य की शासक के रूप में उन्होंने न्याय, सुशासन और जनकल्याण का आदर्श स्थापित किया। काशी विश्वनाथ मंदिर सहित देशभर के अनेक धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण और संरक्षण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनकी दूरदर्शिता, प्रशासनिक क्षमता और समाजसेवा के कारण उन्हें आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाता है।