भोपाल
मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच व्यापार और आवाजाही को नई रफ्तार देने वाली भोपाल-रामगंजमंडी नई रेल लाइन अब अपने मुकाम के करीब है। ₹3,035 करोड़ की लागत वाला यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट साल 2027 तक पूरी तरह चालू हो जाएगा। 276 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के बन जाने से भोपाल, सीहोर और राजगढ़ जैसे जिलों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
5 जिलों की बदलेगी किस्मत
यह रेल लाइन मध्य प्रदेश के भोपाल, सीहोर और राजगढ़ को राजस्थान के झालावाड़ और कोटा जिले से सीधे जोड़ेगी। प्रोजेक्ट का 187 किलोमीटर का हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका है। भोपाल रेल मंडल के तहत निशातपुरा डी केबिन से श्यामपुर तक का 42 किमी का काम पूरा है, वहीं कोटा मंडल ने रामगंजमंडी से राजगढ़ तक 145 किमी की पटरी बिछा दी है। अब केवल 89 किमी का पैच (ब्यावरा-सोनकच्छ-नरसिंहगढ़-कुरावर) बाकी है, जिसे 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
पहाड़ों के बीच से गुजरेगी ट्रेन
यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग का एक बेमिसाल नमूना है। 276 किमी के इस ट्रैक पर 4 बड़ी सुरंगें, 4 बड़े पुल, 34 मुख्य पुल और 171 अंडरपास बनाए जा रहे हैं। 27 स्टेशनों वाला यह रूट न केवल यात्रियों के लिए आरामदायक होगा, बल्कि मालगाड़ियों के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा।
यह लाइन कनेक्टिविटी को बढ़ाएगी, माल ढुलाई को सुव्यवस्थित करेगी और क्षेत्र में रोजगार एवं औद्योगिक विकास को गति देगी।
सौरभ कटारिया, सीनियर डीसीएम
समय और पैसा दोनों की होगी भारी बचत
इस नई लाइन के शुरू होने से दूरी में भारी कटौती होगी:
कोयला परिवहन: झालावाड़ के कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट के लिए कोयला ले जाने वाली गाड़ियों को अब 42 किमी कम दूरी तय करनी होगी।
लंबी दूरी की ट्रेनें: जयपुर से दक्षिण भारत जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेनें अब वाया कोटा-रामगंजमंडी-भोपाल होकर जाएंगी, जिससे 115 किलोमीटर की दूरी और करीब 3 घंटे का समय बचेगा।